जजों के कोड ऑफ़ कंडक्ट के ख़िलाफ़ आचरण कर रहे हैं सीजेआई- शाहनवाज़ आलम
लखनऊ, 18 जनवरी 2026. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत का हरियाणा के मुख्यमंत्री और अन्य भाजपा नेताओं के साथ सार्वजनिक तौर पर मकरसंक्रांति का त्योहार मनाना जजों के कोड ऑफ़ कंडक्ट के ख़िलाफ़ है. ऐसे आचरण से न्यायपालिका की छवि जो पहले से ही ख़राब थी और धूमिल हो जाएगी.
ये बातें कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव शाहनवाज़ आलम ने साप्ताहिक स्पीक अप कार्यक्रम की 230 वीं कड़ी में कहीं.
शाहनवाज़ आलम ने कहा कि ऐसा लगता है कि तथ्यों के बजाए आस्था के आधार पर बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि मामले में फैसला सुनाने वाले पूर्व सीजेआई डी वाई चंद्रचूड़ की राह पर ही मौजूदा सीजेआई सूर्यकांत भी चल रहे हैं. इसी के तहत चंद्रचूड़ की तरह ही वी भी जजों के लिए 1997 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय किए गए कोड ऑफ़ कंडक्ट का मजाक बनाते हुए सत्ताधारी दल के नेताओं के साथ निजी स्तर पर धार्मिक त्योहारों को मना रहे हैं. जिनके इस आचरण से न्यायपालिका की गरिमा, विश्वसनीयता और छवि धूमिल हो रही है.
उन्होंने कहा कि ऐसे आचरण से हाईकोर्ट और निचली अदालतों के जजों को भी यह ग़लत संदेश जाता है कि वे भी विधायकों और पार्षदों के साथ व्यक्तिगत धार्मिक आयोजनों में शामिल हो सकते हैं. जिसका असर उनके फैसलों पर भी पड़ना स्वाभाविक है. उन्होंने कहा कि पिछले दिनों सीजेआई सूर्यकांत ने जिस तरह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने ही उनके ‘मॉडल’ की तारीफ़ की वो न्यायिक नैतिकता के पतन का नया उदाहरण है.
उन्होंने कहा कि पिछले साल जस्टिस सूर्यकांत के पास चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति का मामला गया था जिसपर उन्होंने होली बाद सुनवाई की बात कही थी लेकिन होली बीतने के 11 महीने बाद भी उन्होंने सुनवाई नहीं की और अब फिर होली आने वाली है. इस एक उदाहरण से ही समझा जा सकता है कि सीजेआई की प्रार्थमिकता लोकतंत्र को बचाने के बजाए किसी भी तरह सरकार का बचाव करना हो गया है.
शाहनवाज़ आलम ने यह भी कहा कि अनुच्छेद 32 का दुरुपयोग जिस तरह बंगाल के मामले में इडी ने किया और मामला कोलकाता हाईकोर्ट में होने के बावजूद सुप्रीम कोर्ट उसपर सुनवाई को तैयार हो गया वो आश्चर्यजनक था. यह सारी स्थितियां हमारी न्यायिक व्यवस्था के पूरी तरह से सरकार के प्रभाव में काम करने का प्रमाण बन चुकी हैं. जिसके ख़िलाफ़ राजनैतिक दलों और नागरिक समाज को मुखर होना होगा.


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